आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Hindi Poetry: प्रदीप जिलवाने की कविता- ताज़ा प्रेम

कविता
                
                                                         
                            ताज़े पानी की बात ही कुछ और है
                                                                 
                            
पिघले मोती-सी लगती है हर बूँद
चेहरा देखना कभी ताज़े पानी में
उम्र से भी कम नज़र आओगे।
लगेगा जैसे
कोई दूसरा ही आर्द्र चेहरा
झाँक रहा है शीशे से पानी में।

जाने कहाँ-कहाँ के
किस्सों से भरी होती है ताज़ी हवा
कभी चिड़िया-कभी धूप
कभी बादल, कभी खेत, कभी ईश्वर
और कभी ख़ामोशी की बातें करती है
लगभग तर्कहीन-असंगत-असम्बद्ध।

ताज़ी ख़बर का अपना ही मज़ा है
ताज़ी-ताज़ी रोटियाँ
कुछ ज़्यादा ही खा जाते हैं हम
किसे नहीं भाती
ताज़े फूलों की महक
और ताज़ी धूप का गुनगुना स्पर्श।

सच ही तो है,
ताज़े पानी
ताज़ी हवा
ताज़ी ख़बर
ताज़े फूल
ताज़ी धूप
और ताज़ी रोटियों-सा ही तो स्वाद देता है
ताज़ा प्रेम भी।

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर