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Mugdha Pandey Poem: एक कठोर चेहरे वाली मेहनती औरत

कविता
                
                                                         
                            एक कठोर चेहरे वाली,
                                                                 
                            
मेहनती औरत ,
रोज निकलती है ,
बाजार से,
उसके ,
पग फौलादी हैं,
उसके चलने से,
सड़क में आवाज 
आती है ,
जैसे कि,
सड़क कहती हो ,
कि सुन लो ,
औरतों,
ये मासूमियत
अब अशुभ है 
औरत के लिए 
तुम नहीं जानती
वह कब तुम्हारी दुश्मन
बन जाएगी 
और तुमको खत्म कर देगी ।
तुम देखती हो इस दुनिया को,
मासूम बनकर, 
मगर जानती नहीं,
बहुत सारे रूढ़िवादी
यही तो चाहते हैं 
और इसीलिए
इस मासूमियत की
करते हैं ,
सराहना।
वे चाहते हैं ,
तुम इस मासूमियत के,
पहाड़ में दबी रहो।
साथ ही यह सच है कि 
वे  भय खाते हैं ,
मजबूती से,
इसीलिए ,
अब ये,
मासूमियत ,
बस, जीव से ,
दया दिखाने को रखो,
गलत होता है ,
तो, 
मत रोको,
अपने,
हृदय की
 आवाज़ को, 
अपनी नसों में
दौड़ते रक्त को,
महसूस करो।
ताला मत लगाओ,
इस जुबान पर,
किसी का,
अहित हो रहा है,
तब उतार कर,
फेंक दो ,
मासूमियत,
बन जाओ,
वीरांगना ।
3 वर्ष पहले

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