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Motivational Poetry: द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी की कविता-  उठो धरा के अमर सपूतों, पुनः नया निर्माण करो

कविता
                
                                                         
                            उठो धरा के अमर सपूतों
                                                                 
                            
पुनः नया निर्माण करो। 
जन-जन के जीवन में फिर से 
नई स्फूर्ति, नव प्राण भरो। 

नया प्रात है, नई बात है, 
नई किरण है, ज्योति नई। 
नई उमंगें, नई तरंगें, 
नई आस है, साँस नई। 
युग-युग के मुरझे सुमनों में, 
नई-नई मुस्कान भरो। 

डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ 
नए स्वरों में गाते हैं। 
गुन-गुन-गुन-गुन करते भौंरे 
मस्त हुए मँडराते हैं। 
नवयुग की नूतन वीणा में 
नया राग, नवगान भरो।  आगे पढ़ें

3 वर्ष पहले

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