आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Mahadevi Verma Poetry: विरह का जलजात जीवन, विरह का जलजात!

mahadevi verma hindi kavita virah ka jaljaat jeevan virah ka jaljaat
                
                                                         
                            


विरह का जलजात जीवन, विरह का जलजात!

वेदना में जन्म करुणा में मिला आवास
अश्रु चुनता दिवस इसका; अश्रु गिनती रात;
जीवन विरह का जलजात!

आँसुओं का कोष उर, दृग अश्रु की टकसाल,
तरल जल-कण से बने घन-सा क्षणिक मृदुगात;
जीवन विरह का जलजात!

अश्रु से मधुकण लुटाता आ यहाँ मधुमास,
अश्रु ही की हाट बन आती करुण बरसात;
जीवन विरह का जलजात!

काल इसको दे गया पल-आँसुओं का हार
पूछता इसकी कथा निश्वास ही में वात;
जीवन विरह का जलजात!

जो तुम्हारा हो सके लीला-कमल यह आज,
खिल उठे निरुपम तुम्हारी देख स्मित का प्रात;
जीवन विरह का जलजात!

2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर