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पढ़िये शानदार रोमांटिक गीत 'प्यास जैसी थी वैसी बनी रह गयी'

सोशल मीडिया
                
                                                         
                            साथ जितना मिला हमको कम ही रहा
                                                                 
                            
प्यास जैसी थी वैसी बनी रह गयी

दोपहर की सुलगती हुई धूप में
हमने फेरे लगाये थे कितने यहाँ
जानते हैं  ये पत्थर पड़े राह के
हमने मोती गिराये थे कितने यहाँ
ख़्वाब था एक वो ख़्वाब ही रह गया
और जीने को बस ज़िंदगी रह गयी आगे पढ़ें

3 वर्ष पहले

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