आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Hindi Kavita: केदारनाथ सिंह की कविता 'वह रोटी में नमक की तरह प्रवेश करता है'

kedarnath singh famous hindi kavita wah roti mein namak ki tarah pravesh karta hai
                
                                                         
                            
वह रोटी में नमक की तरह प्रवेश करता है

ताखे पर रखी हुई रात की रोटी
उसके आने की ख़ुशी में ज़रा-सा उछलती है
और एक भूखे आदमी की नींद में गिर पड़ती है

एक बच्चा जगता है
और घने कोहरे में पिता की चाय के लिए दूध ख़रीदने
नुक्कड़ की दुकान तक अकेला चला जाता है

एक पतीली गर्म होने लगती है
एक चेहरा लाल होना शुरू होता है
एक ख़ूँख़ार चमक
तंबाकू के खेतों से उठती है
और आदमी के ख़ून में टहलने लगती है

मेरा ख़याल है
वह आसमान से नहीं
किसी जानवर की माँद से निकलता है
और एक लंबी छलाँग के बाद
किसी गंजे तथा मुस्टंड आदमी के भविष्य में
ग़ायब हो जाता है
अकेला
और शानदार

वह आदमी के सिर उठाने की
यातना है
आदमी का बुख़ार
आदमी की कुल्हाड़ी
जिसे वह कंधे पर रखता है
और जंगल की ओर चल देता है

मेरी बस्ती के लोगों की दुनिया में
वह अकेली चीज़ है
जिस पर भरोसा किया जा सकता है
सिर्फ़ उस पर रोटी नहीं सेंकी जा सकती!

2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर