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काजी नज़रुल इस्लाम: अगर तुम राधा होते श्याम

कविता
                
                                                         
                            अगर तुम राधा होते श्याम।
                                                                 
                            
मेरी तरह बस आठों पहर तुम,
रटते श्याम का नाम।।

वन-फूल की माला निराली
वन जाति नागन काली
कृष्ण प्रेम की भीख मांगने
आते लाख जनम।

तुम, आते इस बृजधाम।।
चुपके चुपके तुमरे हिरदय में
बसता बंसीवाला;
और, धीरे धारे उसकी धुन से
बढ़ती मन की ज्वाला।

पनघट में नैन बिछाए तुम,
रहते आस लगाए
और, काले के संग प्रीत लगाकर
हो जाते बदनाम।।

2 वर्ष पहले

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