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हेमंत देवलेकर की कविता- हँसी का रंग हरा होता है

कविता
                
                                                         
                            हँसी का रंग हरा होता है 
                                                                 
                            
जहाँ-जहाँ भी हरापन है 
तेरे ही खिलखिलाने की अनुगूँज है वहाँ-वहाँ 

कल्पना का रंग होता है आसमानी 
जहाँ तक पसरा हुआ है आसमान 
तेरी कल्पनाओं के दायरे में आता है... आगे पढ़ें

4 वर्ष पहले

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