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गोपाल सिंह नेपाली: इस रिमझिम में चांद हंसा है

gopal singh nepali hindi kavita is rimjhim mein chand hansa hai
                
                                                         
                            

1.
खिड़की खोल जगत को देखो,
बाहर भीतर घनावरण है
शीतल है वाताश, द्रवित है
दिशा, छटा यह निरावरण है
मेघ यान चल रहे झूमकर
शैल-शिखर पर प्रथम चरण है!
बूँद-बूँद बन छहर रहा यह
जीवन का जो जन्म-मरण है!
जो सागर के अतल-वितल में
गर्जन-तर्जन है, हलचल है;
वही ज्वार है उठा यहाँ पर
शिखर-शिखर में चहल-पहल है!

2.
फुहियों में पत्तियाँ नहाई
आज पाँव तक भीगे तरुवर,
उछल शिखर से शिखर पवन भी
झूल रहा तरु की बाँहों पर;
निद्रा भंग, दामिनी चौंकी,
झलक उठे अभिराम सरोवर,
घर के, वन के, अगल-बगल से
छलक पड़े जल स्रोत मचलकर!
हेर रहे छवि श्यामल घन ये
पावस के दिन सुधा पिलाकर
जगा रहा है जड़ को चेतन
जग-जीवन में बुला-जिलाकर!

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2 वर्ष पहले

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