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Dr Om Nishchal Poetry: कुछ करो, यह प्यार का मौसम ठहर जाए

वायरल काव्य
                
                                                         
                            मेघ का, मल्हार का 
                                                                 
                            
मौसम ठहर जाए।
कुछ करो----
यह प्यार का मौसम ठहर जाए।

जल रहा मन आज
सुधियों के अंगारों में
दर्द कुछ हल्का हुआ है
इन फुहारों में
रूप का, अभिसार का मौसम ठहर जाए।

बादलों की गंध में 
खोया हुआ है मन
हो रही है शिराओं में
सावनी सिहरन
जीत का, यह हार का मौसम ठहर जाए। आगे पढ़ें

2 वर्ष पहले

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