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हे प्राणों के प्रिय सपने: भुवनेश्वर 

हे प्राणों के प्रिय सपने: भुवनेश्वर
                
                                                         
                            तुम दूर देश की वासी। 
                                                                 
                            

हे प्राणों के प्रिय सपने 
निखरे सपनों की काया 
मेरे इस लघु जीवन में 
ऐ असीम स्वर्ग की छाया 
मैं बाट जोहती पुरवासी—तुम दूर... 

मेरे जीवन में आओ 
मेरे जीवन के वन को 
मृदु आलोकित कर जाओ 
चंदा तारा से आओ 
मैं संध्यागत आभा-सी-तुम दूर... 
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5 वर्ष पहले

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