तुम दूर देश की वासी।
हे प्राणों के प्रिय सपने
निखरे सपनों की काया
मेरे इस लघु जीवन में
ऐ असीम स्वर्ग की छाया
मैं बाट जोहती पुरवासी—तुम दूर...
मेरे जीवन में आओ
मेरे जीवन के वन को
मृदु आलोकित कर जाओ
चंदा तारा से आओ
मैं संध्यागत आभा-सी-तुम दूर...
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