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Hindi Poetry: भगवत रावत की कविता- इस पराए शहर में

                
                                                         
                            कुछ लोग
                                                                 
                            
आहत हो कर निकले थे घर से
कहानी सुनाते हुए कहते हैं लोग
कि पानी पीने को
लोटा डोर तक नहीं थी
उनके पास

न कुछ से जिंदगी शुरू की उन्होंने
पराए शहरों में
और तन-मन लगा कर
कमाया धन
धन से मान
मान से नाम
इस तरह वे एक दिन
नगर सेठ हुए
जिए पूरी उम्र
सफलताओं की पताका फहराते हुए
वे गाजे-बाजे के साथ
स्वर्गवासी हुए
इरादों के पक्के
वे कभी लौट कर नहीं गए
अपने घरों की तरफ
घर ही आया उन तक
उन्हें प्रणाम करने
और धन्य हुआ आगे पढ़ें

एक वर्ष पहले

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