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भगवत रावत की कविता- हमने चलती चक्की देखी

                
                                                         
                            हमने चलती चक्की देखी
                                                                 
                            
हमने सब कुछ पिसते देखा
हमने चूल्हे बुझते देखे
हमने सब कुछ जलते देखा

हमने देखी पीर पराई
हमने देखी फटी बिवाई
हमने सब कुछ रखा ताक पर
हमने ली लम्बी जमुहाई


11 महीने पहले

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