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Hindi Kavita: सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता 'आंसुओं को स्वप्न बनते पहली बार मैंने'

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पहली बार
मैंने देखा
भौंरे को कमल में
बदलते हुए,
फिर कमल को बदलते
नीले जल में,
फिर नीले जल को
असंख्य श्वेत पक्षियों में,
फिर श्वेत पक्षियों को बदलते
सुर्ख़ आकाश में,
फिर आकाश को बदलते
तुम्हारी हथेलियों में,
और मेरी आंखें बन्द करते
इस तरह आंसुओं को
स्वप्न बनते -
पहली बार मैंने देखा।

2 वर्ष पहले

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