आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Hindi Kavita: कुंवर नारायण की कविता 'एक फूल अपने पेड़ की प्रशाखा मात्र नहीं'

best hindi poetry kunwar narayan hindi kavita ek phool apne pedh ki prashakha maatra nahin
                
                                                         
                            दोनों की बीच 
                                                                 
                            

एक फूल अपने पेड़ की प्रशाखा मात्र नहीं
एक स्वतंत्र रचना-विन्यास में अपनी तरह
सुन्दर का मौलिक रूप भी।

रंगों की व्यवस्था में
मौसम की हरी धारीदार कमीज़ के 
खुले कॉलर पर वह
लाल बटन की तरह
बिल्कुल ढीला टँका
अनायास गिरने गिरने को

वह एक भावना भी है
और एक तर्क भी
एक छोटा-सा जन्म
एक छोटा-सा मरण
और दोनों के बीच
एक बहुत बड़ा फ़र्क़ भी।

साभार - कोई दूसरा नहीं
कुंवर नारायण
राजकमल प्रकाशन 


2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर