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अशोक वाजपेयी: यह ठहरा हुआ निर्जन समय, जिसमें पक्षी और चिड़ियाँ तक चुप हैं

अशोक वाजपेयी: यह ठहरा हुआ निर्जन समय, जिसमें पक्षी और चिड़ियाँ तक चुप हैं
                
                                                         
                            यह ठहरा हुआ निर्जन समय 
                                                                 
                            
जिसमें पक्षी और चिड़ियाँ तक चुप हैं, 
जिसमें रोज़मर्रा की आवाज़ें नहीं सिर्फ़ गूँजें भर हैं, 
जिसमें प्रार्थना, पुकार और विलाप सब मौन में बिला गए हैं, 
जिसमें संग-साथ कहीं दुबका हुआ है, 
जिसमें हर कुछ पर चुप्पी समय की तरह पसर गई है, 
ऐसे समय को हम कैसे लिख पाएँगे?  आगे पढ़ें

5 वर्ष पहले

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