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तस्वीरें, जो ग़ज़लों में बोलती हैं...

Ghazal
                
                                                         
                            झूम के जब रिंदों ने पिला दी 
                                                                 
                            
शैख़ ने चुपके चुपके दुआ दी 

एक कमी थी ताज-महल में 
मैं ने तिरी तस्वीर लगा दी 

आप ने झूटा वा'दा कर के 
आज हमारी उम्र बढ़ा दी 

हाए ये उन का तर्ज़-ए-मोहब्बत 
आँख से बस इक बूँद गिरा दी 

-कैफ़ भोपाली

इक मोहब्बत की ये तस्वीर है दो रंगों में: जावेद अख़्तर

सारी हैरत है मिरी सारी अदा उस की है 
बे-गुनाही है मिरी और सज़ा उस की है 

मेरे अल्फ़ाज़ में जो रंग है वो उस का है 
मेरे एहसास में जो है वो फ़ज़ा उस की है 

शेर मेरे हैं मगर इन में मोहब्बत उस की 
फूल मेरे हैं मगर बाद-ए-सबा उस की है 

इक मोहब्बत की ये तस्वीर है दो रंगों में 
शौक़ सब मेरा है और सारी हया उस की है 

हम ने क्या उस से मोहब्बत की इजाज़त ली थी 
दिल-शिकन ही सही पर बात बजा उस की है 

एक मेरे ही सिवा सब को पुकारे है कोई 
मैं ने पहले ही कहा था ये सदा उस की है 

ख़ून से सींची है मैं ने जो ज़मीं मर मर के 
वो ज़मीं एक सितम-गर ने कहा उस की है 

उस ने ही इस को उजाड़ा है इसे लूटा है 
ये ज़मीं उस की अगर है भी तो क्या उस की है 

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इक मोहब्बत की ये तस्वीर है दो रंगों में: जावेद अख़्तर

8 वर्ष पहले

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