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उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना जरूरी है: वसीम बरेलवी 

उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना जरूरी है: वसीम बरेलवी
                
                                                         
                            उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी है
                                                                 
                            
जो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है

नई उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाये
कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है आगे पढ़ें

6 वर्ष पहले

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