कभी-कभी
जब उसे मालूम नहीं रहता कि
कोई उसे सुन रहा है
तो वह हौले से उसाँस में सिर्फ़
हे भगवन हे भगवन कहती है
वह नास्तिक नहीं लेकिन
तब वह ईश्वर को नहीं पुकार रही होती
उसके उस कहने में कोई शिक़वा नहीं होता
ज़िन्दगी भर उसके साथ जो हुआ
उसने जो सहा
ये दुहराए गए शब्द फ़क़त उसका खुलासा है
एक अनाम दिशा में तकते जाने क्या सोचते अपना पेट भरते हैं
कभी-कभी एक आदिम लम्हे के लिए अचानक अचानक अपने आस-पास देख लेते हुए
मैं इतना चाहता हूं कि वे मुझे अपने पास इतनी दूर पर इस तरह बैठने दें
जहां से वे मेरे चेहरे पर देख सकें कि मैं अपने मन में उनसे कह रहा हूं
खाओ खाओ कोई बात नहीं
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खाओ खाओ कोई बात नहीं
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