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शबीना अदीब: अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई-नई है

शबीना अदीब: अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई-नई है
                
                                                         
                            ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई-नई है, 
                                                                 
                            
अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई-नई है। 

अभी न आएँगी नींद न तुमको, अभी न हमको सुकूँ मिलेगा
अभी तो धड़केगा दिल ज़्यादा, अभी मुहब्बत नई नई है। आगे पढ़ें

7 वर्ष पहले

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