आँख में तेरा 'अक्स तिरे ही एक ख़याल से टूट गया
झील का चाँद तो मछली की हल्की सी चाल से टूट गया
चाहने वालो प्यार में थोड़ी आज़ादी भी लाज़िम है
देखो मेरा फूल ज़ियादा देख-भाल से टूट गया
मुश्किल दौर में अपनों पर दा'वे-दारी भी क्या करते
पतझड़ आई तो हर पत्ता अपनी डाल से टूट गया
कच्चे सपनों से अच्छा है पक्की नींदें सो लेना
ऐसे ख़्वाब को क्या रोना जो पलक के बाल से टूट गया
दिल के आगे 'अक़्ल की सारी चालें फीकी होती हैं
देखो राजा अदना से पियादे की चाल से टूट गया
टूट गया यूँ आँख से आँसू हिज्र के धड़के से 'आलम'
जैसे घुँगरू तबले की पहली ही ताल से टूट गया
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