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देशभक्ति

patriotism
                
                                                         
                            देखकर हमारी शहादत जिसको खुशी मिलती है
                                                                 
                            
है अपना मगर शक्ल पड़ोसी से उसकी मिलती है

ऐसा भी नहीं की मालूम न हो ठिकाना उसका
पर सियासत के दिल में वोटों की बेबसी मिलती है

अजब रिवायत है इस शहर की वफाओं को भूख
और धोखों को बिरयानी से भरी कटोरी मिलती है

वतन से मुहब्बत ही हमें खामोश नहीं रहने देती
वरना चुप रहने की हिदायत तो हमें भी मिलती है

वतन परस्ती का तो ये आलम है यहाँ पर सौरभ
जुबां पे तो मिलती है पर रगों में नहीं मिलती है

 
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8 वर्ष पहले

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