क़तील शिफ़ाई की ग़ज़ल : अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझ को

कतील शिफाई
                
                                                             
                            अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको
                                                                     
                            
मैं हूँ तेरा नसीब अपना बना ले मुझको

मुझसे तू पूछने आया है वफ़ा के मानी
ये तेरी सादादिली मार न डाले मुझको
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1 year ago

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