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मैं उतना याद आऊंगा मुझे जितना भुलाओगे - नज़ीर बनारसी

Nazeer banarasi ghazal kabhi khamosh baithoge kabhi kuch gungunaoge
                
                                                         
                            कभी खामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे,
                                                                 
                            
मैं उतना याद आऊंगा मुझे जितना भुलाओगे।

कोई जब पूछ बैठेगा खामोशी का सबब तुमसे,
बहुत समझाना चाहोगे मगर समझा न पाओगे।

कभी दुनिया मुक्कमल बन के आएगी निगाहों में,
कभी मेरे कभी दुनिया की हर एक शह में पाओगे।

कहीं पर भी रहें हम तुम मोहब्बत फिर मोहब्बत है,
तुम्हें हम याद आयेंगे हमें तुम याद आओगे।
6 वर्ष पहले

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