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नंदकिशोर आचार्य : सुनें कविता 'कुछ भी तो नहीं'

नंदकिशोर आचार्य
                
                                                         
                            कुछ भी तो नहीं 
                                                                 
                            

कुछ भी तो नहीं ठीक-से हुआ 
न बचपना, न समझदारी 
न दोस्ती, न दुश्मनी 
न प्रेम, न परिवार 
न तन्दुरुस्ती, न बीमारी 
न हँसना, न रोना 
न नींद, न जागना 
न रेंगना, न तन कर खड़े रह पाना 
- कविता भी नहीं 

न कामदी हुआ, न त्रासदी 
              ठीक-से जीवन 
इसलिए डरता हूँ 
ठीक से मरूँगा तो न? 
(2008) 

- नंदकिशोर आचार्य 

साभार - पचास कविताएँ, नयी सदी के लिए चयन, वाणी प्रकाशन

नंदकिशोर आचार्य जी की ये कविता सुनिये ख़ुद उनकी आवाज़ में - 


 
9 वर्ष पहले

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