काका हाथरसी की हास्य कविता : मँहगाई 

Kaka Hathrasi
                
                                                             
                            जन-गण मन के देवता, अब तो आँखें खोल
                                                                     
                            
महँगाई से हो गया, जीवन डाँवाडोल
जीवन डाँवाडोल, ख़बर लो शीघ्र कृपालू
कलाकंद के भाव बिक रहे बैंगन-आलू
कहँ 'काका' कवि, दूध-दही को तरसे बच्चे
आठ रुपये के किलो टमाटर, वह भी कच्चे  आगे पढ़ें

1 week ago

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