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यादें-जब इस संगीतकार ने रफ़ी की शख़्सियत को बयां करने के लिए उठाई कलम....

Mohammad Rafi
                
                                                         
                            रफ़ी साहब और संगीतकार नौशाद के संबंध बहुत अच्छे थे। नौशाद साहब ने मोहम्मद रफ़ी के प्रति अपने लगाव को कुछ शेरों और नज़्मों के माध्यम से व्यक्त किया। 
                                                                 
                            

अल्लाह-अल्लाह रफ़ी की आवाज़
रूहे-महमूदो-जान-ए-बज़्मे-अयाज
उसकी हर तान, उसकी हर लय पर
बजने लगते थे ख़ुद दिलों के साज़।।

गायकी है हुस्न-ए-फ़न तेरा रफ़ी
तेरे फ़न पे हम सभी को नाज़ है 
तेरे शाहकोरों ने समझाया हमें 
ज़िदगानी प्यार का इक साज़ है 
मेरी सरगम में भी तेरा जिक्र है 
मेरे गीतों में भी तेरी आवाज है 

गूंजते हैं तेरे नग़मों से अमीरी के महल 

गूंजते हैं तेरे नग़मों से अमीरी के महल 
झोपड़ी में भी ग़रीबों के तेरी आवाज है 

अपनी मौसीक़ी पे सबको फ़ख़्र होता है मगर 
मेरे साथी आज मौसीक़ी को तुझ पर नाज़ है 

शख़्सियत दिल नवाज़ रखता था 
क्या गले में गुदाज़ रखता था 
अपने हों या पराये सब के लिए 
दिल का दरवाज़ा बाज रखता था 
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गूंजते हैं तेरे नग़मों से अमीरी के महल 

8 वर्ष पहले

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