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आदमी आदमी से मिलता है, दिल मगर कम किसी से मिलता है

JIGAR MORADABADI ghazal on human life
                
                                                         
                            -जिगर मुरादाबादी-
                                                                 
                            

आदमी आदमी से मिलता है
दिल मगर कम किसी से मिलता है

भूल जाता हूं मैं सितम उस के
वो कुछ इस सादगी से मिलता है

आज क्या बात है के फूलों का
रंग तेरी हंसी से मिलता है

मिल के भी जो कभी नहीं मिलता
टूट कर दिल उसी से मिलता है

कार-ओ-बार-ए-जहां संवरते हैं
होश जब बेख़ुदी से मिलता है
9 वर्ष पहले

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