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जन्माष्टमी स्पेशल: उनके और ही लच्छन हैं जब लेते हैं अवतार जनम

Janmashtami 2018 poem for krishna janm
                
                                                         
                            

है रीत जनम की यों होती, जिस घर में बाला होता है
उस मंडल में हर मन भीतर सुख चैन दोबाला होता है
सब बात बिथा की भूले हैं, जब भोला-भाला होता है
आनन्द मंदीले बाजत हैं, नित भवन उजाला होता है
यों नेक नछत्तर लेते हैं, इस दुनियां में संसार जनम
पर उनके और ही लच्छन हैं जब लेते हैं अवतार जनम

सुभ साअ़त से यों दुनियां में अवतार गरभ में आते हैं
जो नारद मुनि हैं ध्यान भले सब उनका भेद बताते हैं
वह नेक महूरत से जिस दम इस सृष्टि में जन्मे जाते हैं
जो लीला रचनी होती है वह रूप यह जा दिखलाते हैं
यों देखने में और कहने में, वह रूप तो बाले होते हैं
पर बाले ही पन में उनके उपकार निराले होते हैं

यह बात कही जो मैंने, अब यों समझो इसको ध्यान लगा
है पण्डित पुस्तक बीच लिखा, था कंस जो राजा मथुरा का
धन ढेर बहुत बल तेज निपट, सामान अनेक और डील बड़ा
गज और तुरंग अच्छे नीके अम्बारी होदे जीन सजा
जब बन ठन ऊंचे हस्ती पर, वह पापी आन निकलता था
सब साज़ झलाझल करता था, और संग कटक दल चलता था

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एक रोज़ जो अपने भुज बल पर

8 वर्ष पहले

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