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गोपाल प्रसाद की कविता ‘गिरिराज महाराज की जय’

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जगती में नग बहुत हैं, भारत में नगराज
भारत में गिरि बहुत हैं, ब्रज में श्री गिरिराज
भक्ति मुक्ति अनुरक्ति सब, देवत छप्पर फाड़
पाथर पूजन जात क्यौं, कबिरा पूज पहाड़
पूजित सुंदर श्याम कौं, ब्रज-रक्षक ब्रज-बाड़
सात कोस कौ देवता, मत कहु याहि पहाड़
लीला-रस में सम्मिलित, दर्शनीय गिरिराज
ब्रज की परम विभूति हैं, गोवर्धन महाराज

ब्रज-बसुधा के बीच बिराजत गिरि गोवर्धन
श्याम-सुचिक्कन शिला तरु-लता सघन सुहावन
चहुँदिसि सरवर-ताल अनेकन वन अरु उपवन
वापी-कूप-तड़ाग अमिय जल पिबत भक्तजन
मध्य मानसी गंग घाट छतरी अति सुंदर
संत जपत हरि-नाम बैठ गिरि कंदर अंदर
चन्द्र सरोवर जँह कियो सूरदास नैं बास
यहै परम रासस्थली जन्म लियौ कवि 'व्यास'
जयति गोवर्धनधर प्रभु

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6 वर्ष पहले

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