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कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है : गोपालदास नीरज

gopaldas neeraj
                
                                                         
                            छिप-छिप अश्रु बहाने वालों ! 
                                                                 
                            
मोती व्यर्थ बहाने वालों !
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।

सपना क्या है? नयन सेज पर
सोया हुआ आँख का पानी,
और टूटना है उसका ज्यों
जागे कच्ची नींद जवानी
गीली उमर बनाने वालों।
डूबे बिना नहाने वालों !
कुछ पानी के बह जाने से सावन नहीं मरा करता है। 
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5 वर्ष पहले

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