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इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है...

मुन्नवर राणा
                
                                                         
                            
मुन्नवर राणा का जन्म 26 नवंबर 1952 को रायबरेली में हुआ था। मुनव्वर राणा एक प्रसिद्ध उर्दू शायर और कवि हैं। वें लखनऊ में रहते हैं। शायरी की दुनिया में अनेक शायरों ने अपनी शायरी के लिए प्रेमिकाओं को चुना है, लेकिन मुनव्वर ने अपनी शायरी के लिए मां को चुना, उनकी लिखी गर्इ किताब मां पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।  मुनव्वर राना ने अपना साहित्य अकादमी सम्मान लौटाकर अपने अंदर के विरोध को व्यक्त किया था। 


इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
मां बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।

अभी ज़िंदा है मां मेरी, मुझे कुछ भी नहीं होगा
मैं घर से जब निकलता हूं दुआ भी साथ चलती है

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है
मां दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है

ऐ अंधेरे देख ले मुंह तेरा काला हो गया
मां ने आंखें खोल दी घर में उजाला हो गया

लबों पर उसके कभी बददुआ नहीं होती
बस एक मां है जो मुझसे खफ़ा नहीं होती

‘मुनव्वर‘ मां के आगे यूं कभी खुलकर नहीं रोना
जहां बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती

(साभार- कविता कोश)
9 वर्ष पहले

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