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जीवन दर्शन: 20 बेहतरीन शेर

जीवन दर्शन: 20 बेहतरीन शेर
                
                                                         
                            उस शख़्स के ग़म का कोई अंदाज़ा लगाए,
                                                                 
                            
जिसको कभी रोते हुए देखा न किसी ने।
~वकील अख़्तर 

जैसा दर्द हो वैसा मंज़र होता है,
मौसम तो इंसान के अंदर होता है। 
~अज़ीज़ ऐजाज़ 

अज़ल तो मुफ़्त में बदनाम है ज़माने में,
कुछ उनसे पूछ, जिन्हें ज़िंदगी ने मारा है। 
~फ़ैज़ 

तिरे चराग़ अलग हों, मिरे चराग़ अलग,
मगर उजाला तो फिर भी जुदा नहीं होता। 
~वसीम बरेलवी 

मैं अकेला ही चला था जानिबे-मंज़िल मगर,
लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया। 
~मजरूह सुल्तानपुरी 

रगों में दौड़ने-फ़िरने के हम नहीं कायल,
जो आंख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है। 
~ग़ालिब 
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7 वर्ष पहले

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