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अमर सिंह छछिया की पांच लोकप्रिय हरियाणवी कवितायें

Amar Singh Chhchia
                
                                                         
                            तेरा सदा नाम रहै भीम सूरज चाँद की तरियां
                                                                 
                            

तेरा सदा नाम रहै भीम सूरज चांद की तरियां
ये गरीबे याद करैंगे इस भगवान की तरियां

डॉ.अम्बेडकर होया कुर्बान इस इंसाफ के लिए
परिवर्तन को होया प्राप्त थारै सुधार के लिए
तू दलित शोषित बण्या थारी जिन्दगी के लिए
जोश म्हं आके कर्या विरोध इस महंगाई के लिए
तेरी ए खुशी मनावै या हिन्दुस्तान की दुनियां

कांशी राम नै बणाई पार्टी अपणी राष्ट्रीय करी
जिन्दगी के दिन रहगे थोड़े मायावती के हवालै करी
बी.एस.पी. की फिरी लहर किलकी देश म्हं पड़ी री
उत्तर प्रदेश प्रान्त म्हं मायावती मुख्यमन्त्री करी
इसकी जमानत भी बची नहीं यो खड़ी ओलू की तरियां

राजनीति सत्ता की चाबी थारै हाथ म्हं आई
वो इंसान परखैगा जिसकै या समझ म्हं आई
थारे बोट की कीमत एक लाख की बताई
थाम सारे बोट दियो ब.स.पा. के थारी होगी रुश्नाई
थारै या हे पूरे करैगी लड़ै फौज की तरियां

गरीब तो आवै भका म्हं इसनै नूए ठोकर खाई
जगह-जगह होवैं कांड इसके फेर भी उसे की बणाई
ये क्यूं ना बणावै सरकार अपणी इनकै क या सगाई
उस डॉ. अम्बेडकर न भूल गये जिसनै करी थारी मलाई
भीम तो अमरसिंह कोऐ अवतार आया रविदास संत की तरियां

गरीब तो गरीबे होर्‌या यो अमीर लूट मचार्‌हा

गरीब तो गरीबे होर्‌या यो अमीर लूट मचार्‌हा
अनमोल वोट थारा यो पव्वै के म्हं जार्‌हा
राजनीति सत्ता की चाबी थारै हाथ म्हं आगी
जो डॉ. अम्बेडकर लिखग्या था वा थारे सीनै म्हं लागी
बहुजन समाज पार्टी आलां कै खटक इसकी लागी
थारे सारे पूरे कर देगी जै सरकार म्हारी आगी
थारे बोट, राज इनका क्यों बेज्जती करा र्‌हा

थारे काम के सारे दरवाजे खोल सको सो
बी.एस.पी. के कैंडीडेट थाम भी दीवारा पै लिख सको सो
सरकार म्हारी ए आवैगी थाम भी ऐलान कर सको सो
जो थारे पै करै वकालत उसनै जवाब दे सको सो
ये सारे फिरैं भाजदे ईबकै इनकै पसीना आर्‌हा

थारी जीत का अलबम बणावै गा
कोऐ भी ना देख सकै ओड़ै बटण दबावै गा
जो टक्कर म्हं आवै थारै वो जान्दा ए खाट लेवै गा
उसकी नाड़ी जा ली कुहणी म्हं वो हफ़्ता मुश्कल लेवै गा
कदे जिन्दगी म्हं इलेक्शन लड़ै नहीं वो हाथी की फेट म्हं आर्‌हा

या मोहर हाथी कै लावैगी जनता भी स्याणी होगी
फुल बहुमत आया इसका सरकार भी या म्हारी होगी
मायावती आवै प्रधानमंत्री मन की चाही भी होगी
नाचैं कुदैं गावैं गीत खुशी सारै ए होगी
अमरसिंह यो बड़सी का जी सा ले र्‌हा

खुशी किसे कै होई नहीं जिस दिन कांग्रेसिया आया सै

खुशी किसे कै होई नहीं जिस दिन कांग्रेसिया आया सै
गरीबी रेखा म्हं पीला कार्ड आध्यां का लाया सै।

बेरोजगारी की गरीब कै या बेदन लाग गी
बिन रिश्वत ना मिलै नौकरी सरकार भी इसी आगी
घणी गरीब नै या महंगाई ऐ मारगी
दहेज तै बणै सगाई या रीत ऐसी ए चालगी
यो इंसफ करै कोण यो थामनै ए बणाया सै

घणी तो मर इस गरीब की ए आई
मशीन ए काटै मशीन ए काढै ये सारै ए लाई
ना नलाई ना खुदाई डोली भी ट्रेक्टर नै लाई
जहर का स्प्रे करावै थारै पै डरामी कड़ पै लाई
चढ़ गया गैस होया बेहोश पड़ा खाल म्हं पाया सै

मरते नै करी मजदूरी कुछ लाभ ना थ्याया
सै की दिहाड़ी ईलाज यो एक हजार म्हं होया
बेसक मरग्या होन्दा दुख तो थारा ना होया
गरीबी खत्म करै थे दां दूसरा होया
आपस की फूट थारी नै नाश कराया सै

इन गरीबां की तो कांशीराम ए सुणैगा
जिसनै घोटाले कर राखे उन के चालान करैगा
बाजै सोट ये मारै किलकी इनका रमान्ड करैगा
ना लागै गवाही ना चालै सुपारस वो सीधा जेल म्हं जावैगा
जेल का खाणा हड़हड़ का मिलाणा जद अमरसिंह याद घर आया सै

एक भजन सुणाऊं सै तो बांग बगोला

एक भजन सुणाऊं सै तो बांग बगोला।
जो ध्यान लगा कै सुणैगा उसकै समझ म्हं आवैगा
जो ऊपर नै मुंह बावैगा वो ठोकर खान्दा जावैगा
घरां बुझैंगे तो वो उन्हैं नै के बतलावैगा
वोट मांगण आया सै यो के बोरी ठुवावैगा
इसे-इसे माणस ए का हो दर्शनां म्हं भी तोड़ा

यो कित के वोट देवै था दूसरां नै और सिखावैगा
जो इसकी भका म्हं आग्या तो वो भी खता खावैगा
जय भीम और जय भारत के जो भी नारे लावैगा
देख लियो प्रधानमंत्री कांशीराम ए आवैगा
सभी बिजनस होगी सस्ती नारहै क्याहें का तोड़ा

देख लियो भाइयो रै बख्त फेर ना थ्यावैगा
सांप लिकड़जा पिटै लीक नै फेर पाछै पिछतावैगा
चाहे किते जाकै देख लियो जोर इसे का पावैगा
ढंग तो इसा ए लागै यो सारै जीत के आवैगा
पड़ै वोट लगी लैन चला धणी बीर का जोड़ा

जो टक्कर म्हं आवैगा वो टोह्या नहीं पावैगा
जाणकार हो उसका वो ऐ पता लगावैगा
के टोकै नै करोगे वो थामनै और फंसावैगा
उसनै घोटाले कर राखे वो के बख्सा जावैगा
डंडा बेड़ी घलै हथकड़ी यो कई करोड़ का रोला

देखे सांड होऐ रमान्ड लम्बे वे पाये थे
जैसे काम करे उनै नै उनके आगे आये थे
जुल्म सहन होया नहीं उनके चलाण कटाये थे
मजिस्टेट कै होये पेश जद याद घर के आये थे
अमरसिंह जेल म्हं न्यू देखै जणूं बान्दर कै गेल यो बोला

पांच पार्टी पांच किस्म की कुर्सी की करैं लड़ाई

पांच पार्टी पांच किस्म की कुर्सी की करैं लड़ाई
इन पाचां म्हं भली कौण सी थामी बताओ भाई

देवीलाल यो काडै खाल इसनै जुल्म करा था
27 परसेंट नोकरियां पै इसनै जूत बजाया था
हत्या कांड होया महम म्हं इसनै देश भिड़ाया था
आप सैन्टर म्हं छोरा हरियाणे म्हं मुख्यमंत्री बणाया था
घर का राज बणाकै इसनै लुटा-खसोट मचाई
अटल बिहारी या बिमारी इसनै भी त्यौहार करा था
मस्जिद फोड़ बणाऊं मन्दिर इसनै भी ऐलान करा था
हिन्दू-मुस्लिम की होई लड़ाई उन नै भी अटैक करा था
जम्मू और कश्मीर म्हं भी भारी घमशाण घला था
लालां का नाश कराया था हुकूमत इसकी आई

भजनलाल यो कांग्रेस म्हं सरकार इसकी आई
पहलम झटकै इसनै भी फैक्ट्री या शराब की लाई
बिन रिश्वत ना मिलै नौकरी या भी इसनै चलाई
गरीब आदमी लावै कित तै मर तो इसकी आई
आवै इलेक्शन प्या दे दारू या दुनिया पागल बणाई

बंसीलाल नै भी एक नया विकास चलाया था
एक छोरी और एक छोरे नै भी वो लेकै आया था
इन पै मोहर लगाइयो इबकै सबकै आगै कह रा था
थारे सारे पूरे कर द्यूंगा जो भी बाकी रह रा था
इसनै भी प्रेशन कराये थे ईखां म्हं दुनिया पाई

गिरद गुमार पाटै डूंडा जिब हाथी यो छूटैगा
किसे की जागी टांग जड़ तै किसे का हाथ टूटैगा
उठैगी धूल जागा फूल यो पड़दीये सुकैगा
हाथी करै सफाया इनका नहीं इबकै उकैगा
अमरसिंह कह बड़सी का थारै पसन्द कौण सी आई

(साभार- कविता कोश)
9 वर्ष पहले

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