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पाकिस्तान पर 'अटल' जी की कविता...

आज अटल जी की यह कविता याद आई - ओ नादान पड़ोसी अपनी आँखें खोलो...
                
                                                         
                            एक नहीं दो नहीं करो बीसों समझौते, 
                                                                 
                            
पर स्वतन्त्र भारत का मस्तक नहीं झुकेगा।

अगणित बलिदानों से अर्जित यह स्वतन्त्रता, 
अंश्रु स्वेद शोणित से सिंचित यह स्वतन्त्रता। 
त्याग तेज तपबल से रक्षित यह स्वतन्त्रता, 
दु:खी मनुजता के हित अर्पित यह स्वतन्त्रता। आगे पढ़ें

7 वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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