लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में
- बशीर बद्र
आंसू पोंछ के हंस देता है
आग में आग लगाने वाला
- आरज़ू लखनवी
आग अपने ही लगा सकते हैं
ग़ैर तो सिर्फ़ हवा देते हैं
- मोहम्मद अल्वी
आग लगाई तुम ने ही तो
लोगों ने तो सिर्फ़ हवा दी
- प्रेम भण्डारी
आगे पढ़ें
कमेंट
कमेंट X