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काका हाथरसी

हास्य

काका हाथरसी : चाय चक्रम

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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एकहि साधे सब सधे, सब साधे सब जाय,
दूध- दही- फल अन्न-जल, छोड़ पीजिए चाय।
छोड़ पीजिए चाय, अमृत बीसवीं सदी का,
जग-प्रसिद्ध जैसे गंगाजल गंग नदी का।
कहँ 'काका', इन उपदेशों का अर्थ जानिए,
बिना चाय के मानव-जीवन व्यर्थ मानिए। आगे पढ़ें

चाय चक्रम

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