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स्मरण, स्वांग और कविताओं के रस से सराबोर रहा किताब उत्सव का दूसरा दिन

kitab utsav
                
                                                         
                            भोपाल। मंगलवार 19 जुलाई को हिंदी भवन में चल रहे किताब उत्सव का दूसरा दिन स्वांग, स्मरण और कविताओं के नाम रहा। सांध्यकालीन कार्यक्रम की शुरुआत श्रीनरेश मेहता के शताब्दी स्मरण के साथ हुई। इस अवसर पर आशीष त्रिपाठी जी ने श्रीनरेश मेहता जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर बात की। अगले चरण स्वांग में जाने माने लेखक ज्ञान चतुर्वेदी से नीलेश रघुवंशी ने समय के आख्यान पर बातचीत की। कार्यक्रम का तीसरा और अंतिम चरण 'काव्य संध्या' में शहर के विभिन्न वरिष्ठ अधिकारियों का साहित्यिक पहलु देखने को मिला।  
                                                                 
                            

भोपाल के गौरव हैं श्रीनरेश मेहता
 ''हमारा शहर हमारे गौरव : श्रीनरेश मेहता' में महान साहित्यकार श्रीनरेश मेहता के कालजयी उपन्यास ' यह पथबंधु था' के शताब्दी संस्करण का आवरण जारी किया गया। उनपर सुपरिचित कवि- आलोचक आशीष त्रिपाठी ने व्यख्यान दिया। इस मौके पर हेमंत देवलेकर, ऋतु पल्लवी का रचना पाठ हुआ। कार्यक्रम का संचालन प्रज्ञा रावत ने किया। 

एक से बढ़कर एक रचनाएँ 
काव्य संध्या के सूत्रधार अभिषेक वर्मा ने कार्यक्रम की शुरुआत बहुत ही खूबसूरत पंक्तियों से की। उन्होंने कहा, किताबे ज़िंदगी हमने लिखी हरदम पसीने से, समंदर चीर के लौटे उसी लड़ने सफ़ीना से। अभिषेक सिंह ने अपनी कविताओं से लोगों का मन मोह लिया। उनकी कविता, "मैं इस खौफ में जीता हूँ कि सच कहूंगा तो मारा जाऊँगा" बहुत पसंद की गई। अजय श्रीवास्तव की कविता पुनरावृत्ति की लाइन "सोफे पर बैठी मेरी दो बेटियों के बीच तीसरी बेटी सरीखी मेरी अम्मा।" बहुत ही भावुक कर देने वाली रही।  पवन जैन की कविता "मुक्ति की आकांक्षा ही एकमात्र आकांक्षा है" गहरी और गंभीर कविता थी। रक्षा दुबे चौबे की कविता, "सहसा कुछ नहीं होता" ने दर्शकों की वाहवाही पाई। वहीं शशांक गर्ग की कविता "अम्मा' में माता को लेकर गहरे भाव दिखे। उसकी लाइन, जब भी दिन भर , घिस कर ;खट कर, पैकिट भर ;आटा संग लेकर, दाल भरी पन्नी को लेकर, इक छँटाक भर दुनिया लेकर, घर जाता हूँ ,कुढ़ता -पिसता, और पसर जाता सोफ़े पर, अक्सर याद आता है ;बचपन, अक्सर याद आती है ;अम्मा बहुत संवेदनशील थी।  ऋतू पल्लवी की कविता 'शब्द कह नहीं पाते' भी काफी सराही गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मनोज श्रीवास्तव जी ने कहा, "कवि के लिए भाषा स्वयं में एक प्राणवान जीव है। बाक़ी दूसरे दुनियादार लोगों के लिए भाषा एक वस्तु या एक साधन भर है।" 

राजकमल ओपन माइक 
किताब उत्सव के तहत खास कर छात्रों युवाओं के लिए राजकमल ओपन माइक का आयोजन किया जा रहा है जिसमें उन्हें अपनी रचनाओं का पाठ करने का मौका मिलेगा। 

कबीर और जायसी पर बोलेंगे पुरुषोत्तम अग्रवाल 
किताब उत्सव का एक विशेष कार्यक्रम है, 22 जुलाई को होने वाली, मशहूर आलोचक और संघ लोक सेवा आयोग बोर्ड के पूर्व सदस्य पुरुषोत्तम अग्रवाल की कबीर और जायसी पर बातचीत। इसमें श्रोतागण पुरुषोत्तम अग्रवाल के सामने अपने सवाल भी रख सकेंगे। गौरतलब है कि पुरुषोत्तम अग्रवाल की पुस्तक 'मानुष पेम भएउ बैकुंठी : पद्मावत' हाल ही में राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुई है जिसकी काफी चर्चा हो रही है. कबीर पर उनकी किताब 'अकथ कहानी प्रेम की'  तो हिन्दी आलोचना की सर्वाधिक महत्वपूर्ण कृतियों में शुमार हो चुकी है।
4 वर्ष पहले

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