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Vinod Kumar Shukla: हिन्दी साहित्य के स्तंभ कहे जाने वाले विनोद कुमार शुक्ल का निधन, PM मोदी ने भी जताया दुख

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रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने कहा है कि हिन्दी के शीर्ष कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन हो गया है। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे और इसी अस्पताल में भर्ती थे। वह 88 साल के थे और पिछले कुछ दिनों से गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे। उन्हें सांस की समस्या के चलते AIIMS, रायपुर के क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में भर्ती कराया गया था।

विनोद कुमार शुक्ल के निधन (23 दिसंबर 2025) के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने उनके सम्मान में रायपुर में होने वाले अपने सभी आधिकारिक कार्यक्रमों को रद्द (निरस्त) कर दिया है। बताया गया कि यह फैसला उनकी साहित्यिक विरासत और प्रदेश के लिए उनके योगदान को श्रद्धांजलि देने का एक महत्वपूर्ण कदम है। 

जहां एक तरफ संपूर्ण साहित्य जगत में विनोद जी के निधन पर शोक की लहर व्याप्त है, वहीं प्रधानमंत्री ने भी शोक व्यक्त किया है। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर शोक व्यक्त किया है। अपने एक्स अकाउंट पर उन्होंने लिखा- ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। हिन्दी साहित्य जगत में अपने अमूल्य योगदान के लिए वे हमेशा स्मरणीय रहेंगे। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।
 

जीवन और लेखन की अनोखी पहचान
एक जनवरी 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में जन्मे विनोद कुमार शुक्ल उन लेखकों में थे, जिन्होंने कविता और गद्य दोनों में अपनी अलग और विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी भाषा सरल थी, लेकिन भाव अत्यंत गहरे। आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी, उसकी असुरक्षा, उसका अकेलापन और उसकी करुणा। ये सब उनके लेखन का केंद्र रहे। वे शोर नहीं मचाते थे, बल्कि बहुत धीरे-धीरे पाठक के मन में उतर जाते थे।

रचनाएं, सिनेमा और सम्मान
उनके प्रमुख उपन्यासों में नौकर की कमीज, दीवार में एक खिड़की रहती थी और खिलेगा तो देखेंगे शामिल हैं। नौकर की कमीज पर प्रसिद्ध फिल्मकार मणि कौल ने एक चर्चित कला फिल्म बनाई, जिसे साहित्य और सिनेमा दोनों क्षेत्रों में सराहना मिली। काव्य संग्रह लगभग जय हिंद, सब कुछ होना बचा रहेगा और अतिरिक्त नहीं ने उन्हें कविता का विशिष्ट स्वर दिया। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, मुक्तिबोध फेलोशिप, रजा पुरस्कार सहित अनेक सम्मान मिले। हाल ही में उन्हें भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया था।

9 महीने पहले

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