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Padma Awards 2023: कवि-आलोचक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को पदमश्री

Padma Awards 2023: Padma Shri to poet-critic Vishwanath Prasad Tiwari
                
                                                         
                            गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुस्कार विजेताओं को नामों की घोषणा हुई है। हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को साहित्य और शिक्षा में उत्कृष्ट योगदान के लिए पदमश्री से सम्मानित करने की घोषणा की गई है।
                                                                 
                            

1940 में कुशीनगर, उत्तरप्रदेश के रायपुर भैंसही-भेडिहारी गांव में जन्मे आचार्य विश्वनाथ प्रसाद तिवारी एक लोकप्रिय शिक्षक भी रहे। प्रो. तिवारी गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष पद से वर्ष 2001 में सेवानिवृत्त हुए। 2013 से 2017 तक साहित्य अकादमी, दिल्ली के अध्यक्ष रहे हैं।

आचार्य विश्वनाथ प्रसाद तिवारी साहित्य के अनवरत सहज साधक हैं। उन्होंने गांव की धूल भरी पगडण्डी से इंग्लैण्ड, मारीशस, रूस, नेपाल, अमरीका, नीदरलैण्ड, जर्मनी, फ्रांस, लक्जमबर्ग, बेल्जियम, चीन और थाईलैण्ड की जमीन नापी है। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के कई सम्मान हासिल किये। रूस की राजधानी मास्को में साहित्य के प्रतिष्ठित पुश्किन सम्मान से नवाजे गये। उन्हें उत्तर प्रदेश की सरकार ने शिक्षक श्री का सम्मान दिया। उन्हें उनकी आत्मकथात्मक कृति ‘अस्ति व भवति’ को भारतीय ज्ञानपीठ का मूर्तिदेवी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसके पूर्व डॉ. तिवारी को साहित्य अकादमी का महत्तर सम्मान, सरस्वती सम्मान, व्यास सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान, हिन्दी गौरव सम्मान, महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन सम्मान, महादेवी वर्मा गोयनका सम्मान, भारतीय भाषा परिषद का कृति सम्मान आदि प्राप्त हो चुके हैं।
उनका रचनाकर्म देश और भाषा की सीमा तोड़ता है। उड़िया में कविताओं के दो संकलन प्रकाशित हुए। हजारी प्रसाद द्विवेदी पर लिखी आलोचना पुस्तक का गुजराती और मराठी भाषा में अनुवाद हुआ। इसके अलावा रूसी, नेपाली, अंग्रेजी, मलयालम, पंजाबी, मराठी, बांग्ला, गुजराती, तेलुगु, कन्नड़ व उर्दू में भी इनकी रचनाओं का अनुवाद हुआ।

1978 से हिन्दी की साहित्यिक पत्रिका ‘दस्तावेज’ का लगातार प्रकाशन कर रहे हैं। वहीं इसके सम्पादक भी हैं। उनके शोध व आलोचना के 11 ग्रंथ, 7 कविता संग्रह, दो यात्रा संस्मरण, एक लेखकों का संस्मरण व एक साक्षात्कार पुस्तक प्रकाशित हो चुका है। उन्होंने हिन्दी के कवियों, आलोचकों पर केन्द्रित 16 पुस्तकों का सम्पादन किया है।
3 वर्ष पहले

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