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ऐ मेरे वतन के लोगों: कवि प्रदीप के बोलों को अपनी आवाज़ में अमर कर गईं स्वर कोकिला लता मंगेशकर

lata mangeshkar sung aye mere vatan ke logon written by kavi pradeep
                
                                                         
                            
आज स्वर कोकिला लता मंगेशकर का निधन हो गया। वह लगभग एक महीने से बीमार चल रही थीं। उनकी आवाज़ में कितने ही गाने अमर हो गए, उनमें विशेष है 'ऐ मेरे वतन के लोगों' जिसे कवि प्रदीप ने लिखा है। यह संयोग ही है कि आज कवि प्रदीप की जयंती भी है।,आज लता मंगेशकर के चाहने वाले उन्हें इसी गीत के ज़रिये याद भी कर रहे हैं।

ऐ मेरे वतन के लोगों
तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सब का
लहरा लो तिरंगा प्यारा
पर मत भूलो सीमा पर
वीरों ने है प्राण गँवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो 
जो लौट के घर न आये 

ऐ मेरे वतन के लोगों
ज़रा आँख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी
ज़रा याद करो क़ुरबानी
जब घायल हुआ हिमालय
खतरे में पड़ी आज़ादी
जब तक थी साँस लड़े वो
फिर अपनी लाश बिछा दी
संगीन पे धर कर माथा
सो गये अमर बलिदानी

जब देश में थी दीवाली
वो खेल रहे थे होली
जब हम बैठे थे घरों में
वो झेल रहे थे गोली
थे धन्य जवान वो आपने
थी धन्य वो उनकी जवानी

कोई सिख कोई जाट मराठा
कोई गुरखा कोई मदरासी
सरहद पर मरनेवाला
हर वीर था भारतवासी
जो खून गिरा पवर्अत पर
वो खून था हिंदुस्तानी

थी खून से लथ-पथ काया
फिर भी बन्दूक उठाके
दस-दस को एक ने मारा
फिर गिर गये होश गँवा के
जब अन्त-समय आया तो
कह गये के अब मरते हैं
खुश रहना देश के प्यारों
अब हम तो सफ़र करते हैं
क्या लोग थे वो दीवाने
क्या लोग थे वो अभिमानी

तुम भूल न जाओ उनको
इस लिये कही ये कहानी
4 वर्ष पहले

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