आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Koshala Literature Festival: राजनीति में 'एक्सक्यूज' का दौर हुआ खत्म

koshala literature festival jaideep karnik in conversation with vijay trivedi and shantanu gupta
                
                                                         
                            

लखनऊ में चल रहे तीन-दिवसीय कोशला साहित्योत्सव में 'नए नेतृत्व का दौर' विषय पर लेखक विजय त्रिवेदी ने कहा कि "आज़ादी मिलने के बाद सरकारों के पास यह एक्सक्यूज़ था कि अंग्रेज़ों ने ही जर्जर हिंदुस्तान दिया, जिसे सुधार रहे हैं। ढांचा बना रहे हैं। जनता ने फिर भी उन्हें चुना। बाद में नेताओं के पास इमरजेंसी का एक्सक्यूज़ था। उसके बाद यह एक्सक्यूज़ था कि पिछली सरकारों ने कुछ नहीं किया, इसलिए देश की हालत ऐसी है। लेकिन अब एक्सक्यूज़ का दौर खत्म हो रहा है। अब परफॉर्मन्स देनी होगी, एक्सक्यूज़ से काम नहीं चलेगा।" 

वहीं शांतनु गुप्ता, जिन्होंने 'मोंक हू बिकेम सीएम' किताब लिखी, बताया कि "अब नरेंद्र मोदी ब्रांड पॉलिटिक्स का दौर है। एक आईएएस अफसर ने बताया कि यूपी में 2017 से पहले वाली सरकार में दोपहर 12 से 1 बजे तक कॉल आती थी, आज के दौर में सुबह 7 बजे ही महाराज जी की कॉल आ जाती है। एमवाई, मीम भीम वाली राजनीति का दौर खत्म हो चुका है। सोशल मीडिया का समय है, जहां एक्सक्यूज़ नहीं चलते। अब तो विधानसभाओं के वीडियो वायरल होते हैं और लोग बेबाकी से उस पर अपनी राय रखते हैं। 24*7, 365 दिन वाली राजनीति करनी पड़ेगी अब तो।" 

अमर उजाला डिजिटल के संपादक जयदीप कर्णिक ने कहा कि "जबरदस्त संक्रमणकाल चल रहा है। मुलायम सिंह यादव, अटल बिहारी बाजपेयी, जयललिता आदि नहीं रहे और अब नए नेताओं का उदय हो रहा है, जो नेतृत्व दे रहे हैं।" उन्होंने पूछा कि "भारत का नए नेतृत्व के तौर पर उदय हो रहा है, रूस यूक्रेन युद्ध हो या आर्थिक मोर्चा, भारत की भूमिका को कैसे देखते हैं?" इस सवाल पर विजय त्रिवेदी ने कहा कि "एक सीएम को एक देश ने वीज़ा देने से इनकार कर दिया था, आज वही देश उस व्यक्ति के पीएम होने पर रेड कारपेट बिछाए खड़ा है। यह बदलाव है। सरकार ने करके दिखाया है। वैक्सीन को लेकर सरकार ने जो किया, उससे भी ताकत बढ़ी है।" इस पर शांतनु गुप्ता ने कहा कि "अमेरिका तमाम मामलों में हमसे पीछे है, पर अभी तक यह सोच रही थी कि पश्चिम की मान्यता मिल जाए बस। लेकिन अब यह मिथक भी खत्म हो रहा है।" 

अहम ब्रह्मास्मि की सोच पर चल रही लीडरशिप:
संपादक जयदीप कर्णिक के सवाल कि आज सांसद, विधायक नहीं, मोदी को जिताया जाता है, कहीं ऐसा तो नहीं यह अधिनायकवाद के बढ़ते कदमों की आहट है? इस पर विजय त्रिवेदी ने कहा कि "नरेंद्र मोदी हों, ममता बनर्जी या फिर अरविंद केजरीवाल...आज की लीडरशिप अहम ब्रह्मास्मि की सोच वाली हो गई है। इसका नुकसान यह है कि जब सत्ता खत्म होगी तो पार्टी ध्वस्त हो जाएगी। पार्टीज़ का आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो रही है, कलेक्टिव लीडरशिप खत्म हो रही है।"

विभाजन के बाद यूपी बिहार में बना उर्दू के खिलाफ माहौल

चूंकि देश का विभाजन धार्मिक आधार पर हुआ था, ऐसे में पार्टीशन के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार में उर्दू के खिलाफ माहौल बना। यह जानकारी फरहत एहसास ने बहुत जमीन थोड़ा आसमान विषयक चर्चा में दी। उन्होंने टेक्नोलॉजी के दौर में शायरी का मतलब सवाल पर जवाब दिया कि जैसे पहिये का अविष्कार क्रांतिकारी था, वैसे ही टेक्नोलॉजी से तरक्की हुई है। लेकिन यह तरक्की भौतिक है। इंसान के अंतरतम से शायरी का ताल्लुक होता है। उन्होंने यह  भी कहा कि शायरी अलग है और जूता बनाना अलग। छंद के बगैर जो शायरी होगी, उसमें रस नहीं होगा। छंद के बिना आर्डर पैदा नहीं होता, जिससे उसमें तहजीब नहीं होती। मंच पर अभिषेक शुक्ल और मनीष शुक्ल से उनकी गुफ्तगू हुई।
3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर