अमर उजाला काव्य के कार्यक्रम 'काव्य-कैफ़े' का अगला आयोजन शनिवार 25 जून को शाम 5 बजे से नोएडा दफ़्तर में होगा। कार्यक्रम में अतिथि कवि होंगे
सुनील जी गाज़ीपुरी
सुनील गाज़ीपुरी युवा राष्ट्रवादी कवि हैं, ग़ज़लों के साथ-साथ गीत भी लिखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में शोधार्थी हैं।
आशुतोष विद्यार्थी
बलिया के आशुतोष दिल्ली में रहते हैं। कविताएं और साहित्य में दिलचस्पी स्कूल के समय से थी लेकिन ग़ज़ल से पहली बार मुख़ातिब अपने स्नातक के समय पे हुए। जब जगजीत साहब को सुना था तब ग़ज़ल के बारे में ऐसा कुछ पता नहीं था। 2019 में पहली ग़ज़ल लिखी और आज तक वह सिलसिला ज़ारी है। आशुतोष क्लासिक शाइरी में ग़ालिब, मीर, दाग़ को पसंद करते हैं। बाद के शायरों में फ़ैज़, अहमद फ़राज़, परवीन शाकिर, मजाज़ और साहिर को ख़ूब पढ़ते हैं।
आशुतोष मिश्रा 'अज़ल'
आशुतोष मधुबनी, बिहार से हैं और अभी दिल्ली में रहकर नेट की तैयारी कर रहे हैं। हिंदी से M.A. किया है। 2019 से शाइरी की ओर झुकाव हुआ।
दीपक पाठक
दीपक उत्तर प्रदेश के ज़िले मैनपुरी में छोटे से गॉंव लहरा से ताल्लुक़ रखते हैं, फिलहाल दिल्ली में रहते हैं। दिल्ली में ही रहते हुए बी. ए. से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और अभी हिन्दी से परा-स्नातक कर रहे हैं। इन दिनों गुरुग्राम स्थित कंपना में कार्यरत हैं। साहित्य से लगाव है, विशेषकर उर्दू शायरी से। दीपक उर्दू शायरी पढ़ने और अश'आर याद करने के जुनूनी हैं। दीपक फ़िल्म-गीतकार बनना चाहते हैं।
केसरी नंदन
केसरी समसामयिक विषय पर कविता लेखन करते हैं।
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