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कैलाश सत्यार्थी नए शब्दों- से अपनी कविताओं की रचना करते हैं: लीलाधर जगूड़ी

कैलाश सत्यार्थी नए शब्दों- से अपनी कविताओं की रचना करते हैं:  लीलाधर जगूड़ी
                
                                                         
                            बच्चों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्ति की छठी वर्षगांठ के अवसर पर कैलाश सत्यार्थी के नए कविता संग्रह ‘‘चलो हवाओं का रुख मोड़ें’’ के आवरण पृष्ठ का ऑनलाइन लोकार्पण किया गया। वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित कविता संग्रह के आवरण पृष्ठ का लोकार्पण वरिष्ठ  रचनाकारों और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी और पदमश्री उषा किरण खान एवं वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने किया। लोकार्पण समारोह में चर्चित गीतकार-कवि कुमार विश्वास की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह का आयोजन वाणी डिजिटल ने किया, जबकि संचालन कवि-कलाविद्-आलोचक यतीन्द्र  मिश्र ने किया। 
                                                                 
                            

अपने प्रकाशकीय संबोधन में वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने कहा- नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के कविता संग्रह को प्रकाशित करना हमारे लिए गौरव की बात है। हमारे प्रकाशन को गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर, चेस्वाव मिवोश, विस्साव शिम्बोर्स्का जैसे नोबेल साहित्यक विजेताओं को भी प्रकाशित करने का गौरव हासिल है। सत्यार्थी का कविता संग्रह उसी परंपरा की अगली कड़ी है। कार्यक्रम की शुरुआत में अरुण माहेश्वरी ने कैलाश सत्यार्थी को नई कविता संग्रह की शुभकामनाएं देते हुए उसी संग्रह से एक कविता- 'खुद लिखूंगा अपना शास्त्र' से कुछ पंक्तियों का पाठ किया- 

वेद शास्त्रों की भाषा बोलने वाले तुम्हारे मुंह से 
सहानुभूति, प्रेम या करुणा
या इससे मिलते जुलते 
श्लोकों, मंत्रों और ऋचाओं जैसे शब्द 
बहुत दूर आसमान के सितारों से लगते हैं मुझे 


सामाजिक न्याय और हाशिए के लोग कैलाश सत्यार्थी की कविताओं के विषय हैं। ये कविताएं उन सामाजिक-राजनीतिक विषयों को भी छूती हैं जिनसे आम-अवाम का जीवन प्रत्यक्ष और परोक्ष तरीके से प्रभावित होता है। बाल मजदूरों से संबंधित उनकी कविताएं ओजस्वी होती हैं जो बाल मजदूरों के हताश, निराश और वंचनाओं से भरे जीवन में आशा, सपने और चेतना का संचार करती हैं। उनकी ऐसी कविताएं सत्यार्थी आंदोलन के प्रेरणा गीत भी हैं। सत्यार्थी की कविताएं प्रेम, प्रकृति और भारत की सामासिक संस्कृति को बचाने का आह्वान करती हैं। हिंदी के अनुभव लोक का विस्तार करती हैं।  आगे पढ़ें

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5 वर्ष पहले

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