इंदौर में चल रहे लिट चौक फेस्टिवल के पहले दिन के अंतिम सत्र में अभिनेता फैज़ल मलिक ने कई विषयों पर बेबाकी से अपनी राय दी। वेब सीरीज़ पंचायत में उपप्रधान की भूमिका निभाने वाले फैज़ल ने बायकॉट के मुद्दे पर कहा कि, "जो बायकॉट हो रहा है - यह अजीबोगरीब चीज है। जैसे कोई कह रहा है कि मैं कंगारु के साथ दौडूंगा, क्योंकि सिनेमा देखकर देश बदलने वाला है तो रंग दे बसंती फिल्म के बाद देश के लोगों को फौज में चले जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सारा दारोमदार सिनेमावालों को मत दो, थोड़ा काम घर से बाहर निकल कर खुद को भी करना चाहिए। फैज़ल ने कहा कि जो सोशल मीडिया पर बायकॉट लिख रहा है। उसे शाहरुख खान के सामने खड़ा कर दो तो वो शाहरुख का ऑटोग्राफ लेकर घर जाएगा। बेवजह का बायकॉट हो रहा है। दरअसल दो जीबी डाटा फ्री में तकलीफ़ हो रही है। बॉयकाट का हर दिन एक रुपये लेना शुरू कर दो तो कोई नहीं करेगा। एक फिल्म बनने में ढेर सारी मेहनत लगती है। डेढ़ साल का समय खर्च होता है। बायकॉट का कारण तो वाजिब हो तो फिर कोई बात नहीं, लेकिन जो बेवजह बायकॉट कर रहे है उन्हें एक दोस्त की ज़रूरत है।"
न्यूज पर सेंशरशीप होना चाहिए
फैज़ल मलिक ने कहा कि "फ़िल्मों के बजाए सेंसरशीप न्यूज़ पर होनी चाहिए। वहां बड़ा फसाद फैला है। एंकर चिल्ला चिल्ला कर बोलते है। कुछ लोग तो गाली बकने लगे है। ओटीटी का कंटेंट आपके कंट्रोल में है, आपको नहीं देखना है तो मत देखिए। फैज़ल बोले कि 20 साल हमने बुरा टीवी देखा है। क्योंकि सास भी कभी बहू थी सीरियल देखना सबसे बड़ा अपराध था। इस सीरियल ने देश को बर्बाद किया। औरतों को बर्बाद किया। सीरियल में महिला कभी लैपटॉप धो देती है। फिर नागिन बन जाती है। वेब सीरीज़ में इतना ज्यादा नहीं होता। टीवी सीरियल में तो लोग तैयार बैठे रहते हैं। कोई काम नहीं रहते। दिनभर घर में रहते है। फिर भी करोड़पति रहते हैं। दो तीन हज़ार एपिसोड तक सीरियल चल रहे है। अब टीवी को ठीक होना पड़ेगा।" फैज़ल के साथ चर्चाकार नवनीत ने करीब एक घंटे तक चर्चा की।
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