थिएटर, टेलीविजन से लेकर फ़िल्मों तक अपनी छाप छोड़ने वाले अभिनेता हर्ष छाया इस बार अमर उजाला काव्य के कार्यक्रम ‘शख़्सियत’ का हिस्सा बने।
1993 में आए धारावाहिक आरोहन में सबसे पहले नज़र आने वाले हर्ष आज फ़िल्मों और विज्ञापनों के माध्यम से अपनी अच्छी पहचान बना चुके हैं। उन्हें महेश भट्ट द्वारा निर्देशित फ़िल्म ‘स्वाभिमान’ से बड़ा मौका मिला था इसके बाद उन्होंने ‘कॉरपोरेट’, भेजा फ्राई, फ़ैशन, लागा चुनरी में दाग़ जैसी कई बड़ी फ़िल्मों में भी काम किया। हिन्दी फ़िल्मों के साथ-साथ वह गुजराती फ़िल्मों में भी अभिनय कर चुके हैं। हर्ष ने रिश्ते, हसरतें, तारा, बालिका बधू जैसे कई धारावाहिकों में भी अभिनय किया है।
हर्ष एक हरफ़नमौला व्यक्तित्व के धनी हैं, थिएटर के जितने मंझे हुए कलाकार हैं उतनी ही शानदार आवाज़ भी रखते हैं इसलिए अक्सर कई मौकों पर उनके वॉयर ऑवर भी सुनाई दे जाते हैं, रजनीगंधा का विज्ञापन इसका एक उदाहरण है। इसके साथ ही वह ‘खजूर पे अटके’ फ़िल्म का निर्देशन भी कर चुके हैं।
हर्ष कविताओं के बारे में कहते हैं कि वह स्वयं कवि तो नहीं हैं लेकिन अपने स्कूल के दौरान पढ़ी गई कविताओं को अक्सर याद करते हैं। हर्ष की आवाज़ में पढ़ी गयी कविताएं भी अक्षरों से निकलकर जैसे जीवंत हो जाती हैं।
हमने जाना हर्ष छाया के सफ़र के बारे में और जानीं सिनेमा की बारीकियां
कमेंट
कमेंट X