गणतंत्र दिवस के अवसर पर 25 जनवरी की शाम अमर उजाला काव्य कैफ़े ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसका प्रसारण अमर उजाला और अमर उजाला काव्य के फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल से लाइव किया गया। गणतंत्र दिवस के ख़ास अवसर पर काव्य की यह महफ़िल देशभक्ति के गीतों और रचनाओं से सराबोर रही। कवि सम्मेलन में देशभक्ति रचनाओं के विविध रंग दिखे।
कार्यक्रम की शुरुआत संदीप शज़र ने की, संदीप दिल्ली में रहते हैं, पेशे से अध्यापक और मिजाज़ से कवि हैं। लाल किला गणतंत्र दिवस कवि सम्मेलन सहित देश के विभिन्न राज्यों में प्रतिष्ठित काव्यमंचों पर काव्यपाठ कर चुके हैं। शुरुआत उन्होंने इन पंक्तियों से की-
राष्ट्रभक्ति भावना से ओत-प्रोत दिल लिए
देश राग दुंदुभि बजाने आ गया हूं मैं
शब्द-अर्थ-भाव-पुष्प काव्य में सहेजे हैं जो
इन गुलदानों में सजाने आ गया हूं मैं
शहीदों को नमन करते हुए उन्होंने गाया कि-
वीरता के अप्रतिम उपमान गाए जाएंगे
शौर्य, साहस के मुखर प्रतिमान गाए जाएंगे
लोरी, क्रंदन, राखी के अभिमान गाए जाएंगे
युग युगों तक आपके बलिदान गाए जाएंगे
राकेश पांडेय 'सागर'
आजमगढ़ उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, कविता और गीत लिखते हैं, मूलत: श्रृंगार और देशभक्ति रचनाएं लिखते हैं और तरन्नुम में गाते हैं। राकेश ने अपने काव्यपाठ की शुरुआत देशभक्ति दोहे से की-
वीर सपूतों ने दिया कर ख़ुद को बलिदान
आज दिवस पावन वही करता कोटि प्रणाम
निज माटी निज देश का है हम सब पर कर्ज़
बस अधिकार न जानिए जानें अपना फ़र्ज़
उन्होंने आगे एक दोहा पढ़ा कि-
काव्य कुसुम की गंध को बिखरा दो चहुं ओर
गीत झरें आकाश से मन नाचे बन मोर
अमन जैन
बड़ौत, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। वीर रस के कवि हैं, ओज में काव्यपाठ करते हैं। अमन ने कविता पढ़ी कि-
यही बस प्राण मेरा है यही सम्मान मेरा है
जनम हर बार लूं इस माटी पर अरमान मेरा है
मुल्क होंगे बहुत जो लगते हैं स्वर्ग के जैसे
सभी मुल्कों से प्यारा सिर्फ़ हिंदुस्तान मेरा है
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आपस में भाई-भाई हैं
रहते सब मिल एक साथ नहीं किसी में कोई लड़ाई है
राहुल पंवार
सहारनपुर, उत्तर प्रदेश से हैं, ओज के कवि हैं, वीर रस की कविताएं लिखते हैं और ओज में काव्यपाठ करते हैं। उन्होंने देश व सैनिकों को समर्पित करते हुए कविताएं पढ़ीं।
कवयित्री क्षमा पंडित
पिलखुआ, हापुड़, उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं राजनीतिक सक्रियता के साथ-साथ कविता और साहित्य सृजन में उनकी अभिरुचियां हैं। कविताएं लिखती हैं और कवि सम्मेलनों में हिस्सा लेती रहती हैं। उन्होंने महिला सशक्तिकरण से संबंधित कविताओं से शुरुआत की-
महादेवी वर्मा की सोच हूं मैं
रानी लक्ष्मीबाई की जुनून हूं मैं
नारी की विकट स्थिति पर उबाल मारता खून हूं मैं
नारी का वो रूप नहीं जो छिन्न भिन्न हो लेती हूं
मुझको आता है गिरकर उठना
मैं भारतवर्ष की बेटी हूं
उसके बाद उन्होंने देशभक्ति कविता का पाठ किया-
सौगंध नहीं गीता की ली पर मैंने मन में ठाना है
मुझको भी तिरंगा गद्दारों की छाती पर लहराना है
न चाह हमें सिंहासन की न सत्ता की अभिलाषा है
बस भारत मां की जय-जय हो एक यही हमारी आशा है
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