भारत के माननीय उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बुधवार 14 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रख्यात भरतनाट्यम एवं कुचिपुड़ी नृत्यांगना, कोरियोग्राफर, विदुषी और पद्मश्री सम्मान से सम्मानित डॉ. आनंदा शंकर जयंंत के संस्मरण डांसिंग विद जॉय का विमोचन किया। यह समारोह डॉ. आनंदा शंकर जयंंत के असाधारण जीवन और उनकी प्रेरणादायी यात्रा को समर्पित रहा। भारतीय शास्त्रीय नृत्य, लोक सेवा, अकादमिक अध्ययन और व्यक्तिगत संघर्षों पर विजय पाने की उनकी यात्रा अनेक उपलब्धियों से भरी है। उनका संस्मरण एक ऐसे जीवन की झलक प्रस्तुत करता है, जो कलात्मक उत्कृष्टता, समर्पण, अनुशासन और नृत्य के प्रति अटूट जुनून से आकार लेता रहा है।
पुस्तक का विमोचन संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और उषालक्ष्मी ब्रेस्ट कैंसर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. पी. रघु राम की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। एक प्रतिष्ठित शास्त्रीय नृत्यांगना और कोरियोग्राफर के रूप में डॉ. जयंंत ने भारत की शास्त्रीय नृत्य परंपराओं के संरक्षण और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अपनी उल्लेखनीय कलात्मक यात्रा के साथ-साथ उन्होंने वरिष्ठ रेलवे अधिकारी के रूप में भी सेवाएं दी हैं। वह जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की क्षमता और कला की परिवर्तनकारी शक्ति पर अपने विचारों के माध्यम से अनेक लोगों को प्रेरित करती रही हैं।
कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए डॉ. आनंदा शंकर जयंंत ने कहा, “कैंसर मेरे जीवन का एक अध्याय था, लेकिन यह कभी मेरे पूरे जीवन की कहानी नहीं रहा। मेरी यात्रा ने मुझे सिखाया कि विपरीत परिस्थितियों का साहस के साथ सामना कैसे किया जाए, अपने भीतर की शक्ति को कैसे पहचाना जाए और जीवन को अर्थ देने वाले जुनून को कैसे बनाए रखा जाए। नृत्य हमेशा से मेरे लिए शक्ति, उपचार और दृढ़ता का स्रोत रहा है। डांसिंग विद जॉय के माध्यम से मेरी आशा है कि मैं पाठकों को अपनी-अपनी जीवन यात्राओं को अपनाने, अपनी आंतरिक शक्ति पहचानने और जीवन की चुनौतियों का साहस एवं विश्वास के साथ सामना करने के लिए प्रेरित कर सकूं। हमारे संघर्ष हमें गढ़ सकते हैं, लेकिन उन्हें हमारी पहचान तय करने की आवश्यकता नहीं है। हम उनसे किस तरह उबरते हैं और अपने प्रिय कार्यों को आगे बढ़ाते रहते हैं, यही वास्तव में हमारी कहानी को परिभाषित करता है।”
सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक केवल नृत्य और आनंद की कहानी नहीं है, बल्कि जुनून, कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और अपनी प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारने से मिलने वाली शक्ति का भी संदेश देती है। डॉ. जयंंत की कैंसर से संघर्ष की यात्रा का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक केवल कैंसर के बारे में नहीं, बल्कि उससे आगे बढ़कर जीवन जीने की कहानी है। उन्होंने कहा कि किसी कार्य के प्रति गहरा जुनून कठिन समय में संबल प्रदान कर सकता है और व्यक्ति को चुनौतियों से उबरने में मदद कर सकता है।
पुस्तक के उस संदेश का उल्लेख करते हुए, जिसमें बताया गया है कि DANCER यानी नर्तकी शब्द का ‘D’, लेखिका को CANCER यानी कैंसर के ‘C’ पर विजय पाने की शक्ति देता है, सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि वर्षों के अभ्यास, अनुशासन और समर्पण से विकसित नृत्य ने डॉ. आनंदा को जीवन की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक का सामना करने की शक्ति दी। उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण के राष्ट्रीय कार्यक्रम जैसी पहलों के माध्यम से निवारक स्वास्थ्य सेवाओं, जागरूकता और बीमारियों की शुरुआती जांच को मजबूत कर रहा है।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में कैंसर उपचार सुविधाओं का विस्तार होने से मरीजों को अपने घरों के नजदीक विशेष चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है। देश में 700 से अधिक जिला क्लीनिक और 500 डे-केयर कैंसर केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 19 राज्य कैंसर संस्थानों और 20 तृतीयक देखभाल कैंसर केंद्रों को संचालन के लिए मंजूरी दी गई है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष मिलने वाले ₹5 लाख तक के स्वास्थ्य कवरेज और फरवरी 2026 में शुरू किए गए देशव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान का भी उल्लेख किया। इस अभियान का उद्देश्य लगभग 1.2 करोड़ किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षा प्रदान करना है। अब तक 50 लाख से अधिक किशोरियों का टीकाकरण किया जा चुका है।
डॉ. आनंदा की जीवन यात्रा से मिलने वाली सीखों पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सफलता और असफलता जीवन का हिस्सा हैं और प्रत्येक असफलता सीखने तथा नए संकल्प के साथ दोबारा आगे बढ़ने का अवसर देती है। उन्होंने कैंसर और अन्य गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे लोगों को आशावान बने रहने और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कठिनाइयों का सामना करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जागरूकता, समय रहते बीमारी की पहचान और उचित समय पर उपचार से जीवन बचाए जा सकते हैं।
उपराष्ट्रपति ने कैंसर मरीजों की देखभाल में परिवारों और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कठिन समय में परिवार भावनात्मक सहारा, देखभाल और प्रोत्साहन प्रदान करते हैं तथा कई बार इसके लिए बड़े व्यक्तिगत और आर्थिक त्याग भी करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रतिभा तभी उत्कृष्टता में बदल सकती है, जब उसे निरंतर सीखने, अभ्यास और समर्पण के माध्यम से विकसित किया जाए। उनके अनुसार, जुनून व्यक्ति की शक्ति का स्रोत है और दैनिक जीवन में अर्जित कौशल अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना करने में भी मददगार साबित हो सकते हैं।
डॉ. जयंंत को उनके संस्मरण के विमोचन पर बधाई देते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने आशा व्यक्त की कि डांसिंग विद जॉय युवाओं को अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे विकसित करने के लिए प्रेरित करेगी, अनेक लोगों के जीवन को प्रभावित करेगी तथा पाठकों को जीवन की चुनौतियों का सामना साहस, गरिमा और आनंद के साथ करने का संदेश देगी। उषालक्ष्मी ब्रेस्ट कैंसर फाउंडेशन के अध्यक्ष और डॉ. जयंंत का उपचार करने वाले सर्जन डॉ. पी. रघु राम ने भी इस संस्मरण की सराहना करते हुए कैंसर से उनकी संघर्ष यात्रा के दौरान आए परिवर्तन को याद किया। उन्होंने कहा, “उनका उपचार करने वाले सर्जन के रूप में मैंने केवल कैंसर से जूझती एक मरीज को नहीं देखा, बल्कि एक ऐसी कलाकार को देखा, जिसने विपरीत परिस्थितियों को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। इस प्रक्रिया में उन्होंने स्वयं को स्वस्थ होने की दिशा में आगे बढ़ाया और अनगिनत अन्य लोगों को प्रेरित किया।”
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही, जिसने इस अवसर को यादगार बना दिया। समारोह में चिकित्सकों, कैंसर विशेषज्ञों और कैंसर से उबर चुके लोगों ने भी भाग लिया, जिससे इस आयोजन का महत्व और बढ़ गया।
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