शूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते,
विघ्नों को गले लगाते हैं, कांटों में राह बनाते हैं
इन पंक्तियों के साथ रविवार शाम सात बजे 'अमर उजाला मां तुझे प्रणाम' आयोजन के समापन समारोह का आगाज डिजिटल माध्यम से किया गया। कार्यक्रम का पूरा प्रसारण अमर उजाला काव्य के फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल पर हुआ। इस आयोजन में विशेष अतिथि के तौर पर मुंबई से चिन्मयी त्रिपाठी और जोएल मुखर्जी जुड़े। दोनों ही कलाकार कविताओं और गजलों को संगीतबद्ध कर अपनी आवाज देते हैं। उन्होंने महादेवी वर्मा की 'जाग तुझको दूर जाना', फिराक गोरखपुरी की 'गजल का साज उठाओ', कबीरदास की 'जरा हल्के गाड़ी हांको' और शिवमंगल सिंह सुमन की 'मरघट की ज्वाला' जैसी कितनी ही रचनाओं को संगीत दिया है। चिन्मयी स्वयं भी लिखती हैं, उन्होंने कविताओं के साथ-साथ सिनेमा के लिए भी कुछ गीत लिखे हैं। इनके दो एल्बम सुन जरा और मन बावरा को लोगों का खूब प्यार मिला।
चिन्मयी ने बताया कि वह साहित्यिक परिवार से आती हैं और जोएल का परिवार संगीत से जुड़ा हुआ है। साथ मिलकर इन्होंने पोएट्री एंड म्यूजिक नाम से प्रयोग किया है। मुक्तछंद कविताओं को संगीत देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हर कविता में एक संगीत होता है, बस उसे टटोलना होता है। कार्यक्रम के दौरान इस जोड़ी ने रामधारी सिंह दिनकर की रश्मिरथी और कलम आज उनकी जय बोल, हरिवंशराय बच्चन की पगला मल्लाह के साथ कबीर, महादेवी और फिराक की रचनाओं की भी प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में मां तुझे प्रणाम के तहत होने वाली ऑनलाइन प्रतियोगिता के परिणाम की घोषणा भी की गयी। इस वर्ष अमर उजाला मां तुझे प्रणाम के अंतर्गत अनेक प्रांतों में आजादी का जश्न विभिन्न प्रतियोगिताओं और आयोजनों द्वारा मनाया गया। इन आयोजनों से लाखों की संख्या में बच्चे, युवा और बुजुर्गों ने जुड़कर देश के प्रति अपना प्रेम व्यक्त किया। अनेक प्रविष्टियां आईं जिनका अमर उजाला के अलग-अलग संस्करणों में मुआयना कर विजेता चुने गए थे।
4 वर्ष पहले
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