वर्ष 2018 की श्रेष्ठ कृतियों के लिए शब्द सम्मान की घोषणा कर दी गई है। इसके अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों में सम्मान दिया जाता है। ‘थाप’ श्रेणी के अंतर्गत रचनाकार की पहली किताब शामिल होती है। इस श्रेणी में कवि अंबर पांडेय की कृति ‘कोलाहल की कविताएं’ को चुना गया है। यह किताब वाणी प्रकाशन के प्रकाशित हुई है।
अंबर युवा पीढ़ी के एक विलक्षण कवि हैं जिनकी कविताओं में भाषा की एक सुंदर आवाजाही है। जहां संस्कृत का संयम है तो उर्दू की रूमानियत भी है। उनकी कविताएं बहुभाषिक संस्कारों का विलक्षण उदाहरण हैं। उनकी काव्य-प्रतिभा की विशेष बात यह है कि वह ऐसे मुश्किल विषयों का चयन करते हैं जिन्हें कवि संकोचवश अपनी कविताओं में शामिल नहीं करते। न सिर्फ़ भाषाई योग्यता बल्कि व्यंग्य की कसौटी पर भी उनकी कविताएं खरी उतरती हैं।
अंबर का जन्म 15 दिसंबर 1984 को मध्य-प्रदेश के इंदौर शहर में हुआ था। उन्हें दर्शन व सिनेमा के अध्ययन में विशेष दिलचस्पी है। इसका प्रभाव उनकी कविताओं पर देखा जा सकता है। अंबर पांडेय ने न सिर्फ़ संस्कृत, हिंदी और उर्दू बल्कि फ्रांसीसी और गुजराती भाषा के प्राय: इन सभी भाषाओं में कविताओं और कहानियों का लेखन किया है। जो पकड़ वह काव्य-विधा पर रखते हैं उसी अधिकार के साथ वह गद्य लेखन भी करते हैं।
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